हम अधूरे हैं

मैं एक कहानी लिखना चाहता हूँ, मगर वो लोग मुझे नहीं मिल रहे ....जिनसे कहानी बन सके , मिलते भी हैं तो उन लोगों के बीच कोई संबंध नहीं दिखता मुझे ....जैसे कभी सड़क पर दो अनजान आदमी आपस मे टकरा जाते हैं और फिर कुछ शब्द "सॉरी,कोई बात नहीं,आपको लगी तो नहीं" बोलकर भी एक रिश्ता बना लेते हैं। मगर मेरी कहानी में वो लोग टकराते ही नहीं , कोई ग़लती ही नहीं करते जिससे उन्हें समझा कर के जोड़ा जा सके .....वो कहते है "हम अधूरे हैं" दरअसल हम सब अधूरे है ....हम कभी  पूरे हो ही नहीं सकते, हमारे अधूरे होने के पीछे एक और सुख को पाने की इच्छा छुपी होती है।

ये कहानी अधूरी नहीं है । ऐसा वो लोग कह रहे है जिन्होंने मुझसे कहा था  "हम अधूरे हैं"

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