शब्दों की कड़ी
शब्दों की कड़ी
मैं कुछ घंटे बगीचे में चुप बैठा रहा बिना किसी से कुछ बात किये, मेरे सामने एक नदी थी, नदी में एक नाव जिसको माझी उस पार ले जा रहा था और नदी पार एक घना जंगल था, और सब कुछ इतना ज़्यादा सुन्दर और शांत था की मैं नदी को देखते-देखते उनकी लहरों के साथ कब बहने लगा और जंगल में कहाँ गुम हो गया मुझे पता ही नही चला, नदी की लहरें कुछ यूं बह रही थी मुझे अपने साथ लेके जैसे हम दोनों एक दुसरे को सदियों से जानते हों, थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया, ये मैं कहाँ चला आया हूँ कितना खूबसूरत है ये सब कुछ ….जंगल जिस तरह हवा के साथ झूल रहा था, कभी दायें कभी बायें वैसे वैसे मुझे उसकी ख़ूबसूरती का नशा भी चढ़ रहा था, और नदी मुझे अपनी लहरों पे झूला झुला रही थी, “आज जाने की जिद न करो” फ़ोन बजा, मेरी आँख खुल गयी, मैंने देखा मेरा फ़ोन बज रहा था…दोस्त का फ़ोन था, उससे बात करने के बाद मैंने अंगडाई ली और मुस्कुराते हुए अपनी बालकनी पे आया और एक सिगरेट जलाई और अंदर ही अन्दर एक ख़ुशी महसूस करता रहा सब कुछ एकदम शांत था, रात के दो बज रहे थे….सिगरेट पीने के बाद अन्दर आया और कुछ देर शीशे के सामने खड़े होकर खुद को देखता रहा और धीरे धीरे मुस्कुराता रहा…..और यही सोचता रहा की सब कुछ कितना खूबसूरत है… और वापिस बिस्तर पे लेट गया और कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला…..
कभी-कभी उन एहसासों को लिखना कितना मुश्किल हो जाता है, जो हम महसूस करते हैं …….जब मैं कभी कोई किताब पढ़ता हूँ, और कोई खूबसूरत बात आती है तो लगता है सब कुछ यहीं रुक जाये, मैं उस वक़्त को रोक लेना चाहता हूँ, उस वक़्त अन्दर जो एक टीस उठती है, उस मीठे दर्द को बार-बार महसूस करना चाहता हूँ, उतना उसको पा भी लेना चाहता हूँ| लेकिन जब वो वक़्त चला जाता है, तो मैं उदास हो जाता हूँ, खुद को समझाने की कोशिश करता हूँ उस वक़्त का गुज़र जाना ही अच्छा होता है जहाँ कुछ नया सृजन नहीं होता….।
Beautifully written ❤❤❤
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया नैंसी 🌸
Deleteभावनाओ की सुंदर अभिव्यक्ति👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद🌸
DeleteRelly beautiful 🌹❤️
ReplyDeleteThank-you 🌸
Deleteबलदते समय से डर लगता है ,, काश वे खूबशूरत पल हमेशा के लिए ठहर जाए , वक्त जाए मै रोक ना पाउं......!
ReplyDelete🌸🌸🌸
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