कमरा नंबर 102
बड़ी छोटी सी ज़िन्दगी थी मेरी…. चारू, मैं और एक प्यारी सी बच्ची... बहुत खुश थे हम….
मुझे याद है …चांदिनी रात थी, और उस दिन “चारू” बहुत परेशान थी, उसको ब्रेन ट्यूमर था… वो हॉस्पिटल के कमरा नंबर 102 में एडमिट थी, डॉक्टर्स उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, और मैं सब कुछ जानते हुए भी अनजान बन रहा था …और उससे बार-बार कह रह था, “चारू तुम्हे कुछ नहीं होगा”, उसका दर्द मुझसे देखा नहीं जा रहा था…. उसको देख के मुझे ये अहसास हो रहा था, की वो बहुत तेज से चीखना चाहती थी, चिल्लाना चाहती थी, बताना चाहती थी कहना चाहती थी… की मुझसे ये दर्द सहन नहीं हो रहा है, “आकाश कुछ करो न ….अब नहीं प्लीज्ज्ज़” वो हमेशा कहती थी…..
एक बार मुझे याद है शादी के बाद एक रात हम डिनर पर गये थे, तब चारू ने मुझे अपने कॉलेज के वक़्त की एक बात बताई थी…. जब वो मुंबई के एक कॉलेज से MBA कर रही थी तब एक बार उसकी तबियत खराब हो गयी और डॉक्टर ने उसको बोला आपको इंजेक्शन लगाना पड़ेगा, इंजेक्शन का नाम सुनते ही चारू की आँख में आंसू , की उससे ये दर्द सहा नहीं जायेगा…बड़ा ही मासूम सा चेहरा बनाते हुए ”सर कोई मेडिसिन दे दो इंजेक्शन नहीं प्लीज्ज्ज़” चारू की तबियत सही होने में पंद्रह दिन लग गये थे… चारू को मैं कॉलेज के टाइम से जानता हूँ….एक बार हम साथ में वाइन पी रहे थे और चारू को हल्का नशा हो गया था …..तब चारू ने मुझसे कहा था “जानते हो यार आकाश मैं सबके दर्द बर्दाश्त कर सकती हूँ मगर मुझसे मेरा दर्द बर्दाश्त नहीं होता हैं मैं उस दर्द को ख़तम करने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ” चारु जैसी दिखती थी वैसी बिलकुल भी नहीं थी अन्दर से बहुत ही मासूम और बाहर से उतनी ही सख्त थी| “कभी कभी बीमारी के दर्द से अधिक भयावह वो दर्द होता है….जो हम अपने चाहने वाले के सामने मुस्कुरा के या कभी-कभी रोके छिपाने की कोशिश करते है जिससे उसको तकलीफ न हो मगर छुपा नहीं पाते” मैं कुछ नहीं कर पा रहा था….जिस दर्द को मैं देख नहीं पा रह था उसे चारू झेल रही थी…. वो हॉस्पिटल के बिस्तर पे लेटी हुई थी वो उस दर्द को बता नहीं सकती थी, मगर उसकी आँखें सब कुछ कह रही थीं लेकिन वो मुझे परेशान नहीं देखना चाहती थी, इसलिए सबकुछ छुपाने की बहुत कोशिश कर रही थी ….मुझे उसके आंसू दिख न जाये इसलिए वो मुझसे दूर चली जाना चाहती थी कुछ देर के लिए, मगर वो कहीं जा नहीं सकती थी……..
चारू को रात का सफ़र बहुत पसंद था, वो जब भी बहुत खुश होती मेरे पास आती और बिना कुछ बोले मुझे अपनी बाँहों में भर लेती और कहती “आकाश कहीं लम्बी सैर पे चले तुम्हारे उस पसंदीदा गाने के साथ” (बड़े अच्छे लगते हो ये धरती, ये नदियाँ, ये रैना )चारू गाना गुनगुना रही थी ……मैंने धीरे से कहा “और” वो जोर से हँसने लगी और अब हम लम्बी सैर पे निकल चुके थे|……..और कहीं दूर सन्नाटे हाईवे पे जाकर गाड़ी रोक कर हम बाहर निकले, चांदिनी रात थी सब कुछ साफ़-साफ़ दिख रहा था| …..चांदिनी रात के उजाले में चारू और भी खूबसूरत लग रही थी तभी मैंने अपनी सिगरेट जलाई, चारू को मेरा सिगरेट पीना बिलकुल भी पसंद नहीं था मैंने पहला कश लिया ही थी … “आकाश सिगरेट छोड़ दो मुझे बिलकुल भी नहीं अच्छा लगता है वरना मैं तुम्हें छोड़ दूंगी एक दिन”…….और मैं जोर जोर से हँसने लगा……..
तभी डॉक्टर ने मेरे कंधे पे हाथ रखा…… मिस्टर आकाश …मिस्टर आकाश …ऍम सॉरी हम आपकी पत्नी को बचा नहीं सके …she’s no more …मेरी आँखों में एक बूँद भी आंसू नहीं आये मगर वो दर्द उतर आया था जो न मैं किसी से कह सकता था न कुछ कर सकता था …..मेरी आँखें पत्थर सी हो चुकी थी ….मैं बहुत तेज़-तेज़ रोना चाह रहा था मगर नहीं तभी मेरी बेटी ने मेरी ऊँगली को पकड़ा मैंने उसकी तरफ देखा…..
“पापा”
और हम दोनों रो पड़े |

Nailed IT 👏🔥
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया 🌸
DeleteBahot khoob bhai waah😊😊😊
ReplyDeleteबहुत शुक्रिया 🌸
DeleteNice 👍
ReplyDelete❤️❤️👌👌👌🤗
ReplyDeleteIt's amazing story sir
ReplyDeleteNice 👍
ReplyDeleteसुंदरअभिव्यक्ति
ReplyDeleteMuskil hota hai kisi apne ko dard me dekhna
ReplyDelete🙌🏻👏🏻👏🏻
ReplyDelete✍️💪
ReplyDeleteBest one....
ReplyDeleteBest one....
ReplyDeleteBohot khoob uncle Sam... 👌👌👌👍
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteVery good
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